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Friday, December 21, 2018
How to Stay Fit and Healthy | ऐसे रखें खुद का ख्याल
आजकल बाजार में सेहत बनाये रखने के लिए कई तरह के पाउडर और पेय पदार्थ है। मगर इनको अपनाना ही अपनी सेहत बनाने का रास्ता नहीं है अपितु अपनी रोजाना की दिनचर्या में कुछ छोटे-छोटे बदलाव करके भी खुद को स्वस्थ रखा जा सकता है ये बदलाव न केवल आपको तंदुरस्त रखेंगे बल्कि कई स्वास्थ्य सम्बन्धी समस्याओं से भी दूर रखेंगी।
सिर नीचे पैर ऊपर
फोन पर बात करने के दौरान या खाली समय में पीठ के बल लेट जाएं और अपने पैरों को दीवार के सहारे टिका लें।
आपके ऐसा करने से नसों में रक्त के जमने की समस्या का ख़तरा कम होता है।
इससे रक्त का संचार मस्तिष्क की ओर बढ़ता है और की नसों को भी आराम पहुंचेगा।
गले का भी रखें ख्याल
चेहरा,बाल और हाथों का ख़्याल रखने के लिए हम कई प्रकार के उपाय करते हैं लेकिन गले का थोड़ा काम ही ध्यान रखते हैं।
गले की त्वचा पतली और संवेदनशील होती है। इसलिए गले का ध्यान रखना बहुत ही जरुरी है।
चेहरे की तरह गले पर भी रोज़ाना माॅइश्चराइज़र लगाएं।
हमेशा साथ रखें पानी
यह जानकारी लगभग सबको होती है कि एक दिन भर में 6- 8 गिलास पानी तो ज़रूर पीना चाहिए, जानते सब है मगर अमल बहुत कम लोग करते है।
इसे अमल में न ला पाने का सबसे बड़ा कारण है कि पानी पीना भूल जाना।
खासकर सर्दियों में तो लोग अक्सर पानी पीना भूल जाते है क्यूंकि इन दिनों में प्यास भी काम लगती है।
इसलिए जहां भी जाएं अपने साथ एक पानी की बोतल ज़रूर रखें।
ऑफिस डेस्क पर पानी रखते ही हैं, लेकिन बैग और कार में भी पानी की छोटी बोतल ज़रूर रखें।
सैटिन का तकिया
तकिए के कपड़े का सीधा सम्बन्ध आपके चेहरे से होता है।
अगर कपडा कड़क हुआ, तो झुर्रियां बढ़ सकती हैं। इससे बचने के लिए मुलायम रेशम या सैटिन के तकिए का उपयोग करें।
इससे चेहरा और बाल नहीं बिगड़ेंगे।
कसकर बाल न बांधें
पोनीटेल बनाकर बालों को पीछे कसकर बांधना बालों के लिए बहुत ही नुकसानदायक होता है।
यह बालों को कमज़ोर बनाती है और समय के साथ बाल टूटने की समस्या बढ़ जाती है।
बालों को पीछे खींचकर बांधने से हेयर लाइन भी पीछे चली जाती है।
रबर बैंड की बजाय स्पायरल बैंड का उपयोग करें जिससे बाल बंधे होने पर भी ढीले नहीं होंगे।
Sunday, November 11, 2018
सेहत के लिए बहुत लाभदायक होते हैं कच्चे केले | Raw Bananas Health Benefits in Hindi
Raw Bananas Health Benefits in Hindi कच्चे और पके फल दोनों ही सेहत के लिए बहुत ही लाभदायक होते है। ये पोषक तत्वों से भरपूर होते है कच्चा केला भी उन्ही में से एक है और सेहत के लिए बहुत ही लाभदायक है इसमें कई तरह के पोषक तत्व और विटामिन्स होते है जो हमारे शरीर के लिए फायदेमंद है।
भरपूर मात्रा में फाइबर
कच्चे केले में भरपूर मात्रा में फाइबर होता है जो हमारे हृदय और पाचन क्रिया के लिए बहुत ही लाभदायक है।
2.6 ग्राम फाइबर हमें करीब 100 ग्राम कच्चे केले में मिल जाता है।
2.6 ग्राम फाइबर हमें करीब 100 ग्राम कच्चे केले में मिल जाता है।
जिस भी भोजन में फाइबर होता है वह रक्त में शर्करा को कंट्रोल करने में सहायक होता है।
इससे अटैक का खतरा भी कम रहता है और कोलोस्ट्रोल का स्तर भी नियंत्रण में रहता है।
कच्चे और पके केले दोनों में ही बड़ी मात्रा में पोटैशियम होता है।
पोटैशियम छोटी रक्तवाहिकाओं को बड़ा करने का कार्य भी करता है।
जिस कारन ब्लड प्रेशर (Blood Pressure) को भी नियंत्रण में रखता है।
करीब एक कप कच्चे केले में 531 mg पोटैशियम की मात्रा होती है।
विभिन्न रोगों में फ़ायदेमंद
वज़न बढ़ाने के लिए, गर्भवती महिलाओं के लिए, बच्चों के विकास के लिए, हृदय तथा मधुमेह के मरीज़ों के लिए यह फ़ायदेमंद होता है।
उल्टी और पेट की जलन हाेने पर इसे खाने से राहत मिलती है।
दक्षिण भारत में नारियल के अलावा केलों का भी बेहद अधिक सेवन किया जाता है।
कच्चे केले का चूर्ण बनाकर 3 से 6 वर्ष तक के बच्चों को दिया जाता है जो उनकी सेहत के लिए फ़ायदेमंद होता है।
स्टार्च की मात्रा
कच्चे केले में बहुत बड़ी मात्रा में स्टार्च पाया जाता है। स्टार्च तत्काल ऊर्जा का अच्छा स्राेत है।
कच्चे केले में बहुत बड़ी मात्रा में स्टार्च पाया जाता है। स्टार्च तत्काल ऊर्जा का अच्छा स्राेत है।
एक कच्चे केले में 105 कैलोरी होती है जो कि 90 प्रतिशत कार्ब्स से आती है।
इसमें पोषक तत्व भी अधिक मात्रा में होते हैं, जैसे पोटैशियम, विटामिन बी 6, विटामिन सी, मैग्नीशियम आदि।
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Friday, October 12, 2018
लिवर को ठीक रखने में मददगार आहार | Liver Care Tips Hindi
Liver Care Tips Hindi कई बीमारियों और बुरी लतों की वजह से लिवर में कमजोरी आ जाती है। पीलिया जैसी बीमारियों से ऐसा हो सकता है। ऐसे में पाचनतंत्र को ठीक रखने में कई प्रकार के आहार मददगार होते हैं.
बॉडी को हाइड्रेट रखिए
शरीर को हाइड्रेटेड रखकर लिवर को पीलिया से जल्दी ठीक किया जा सकता है। ऐसा करने के लिए पानी की बहुत बड़ी भूमिका होती है।
पानी न सिर्फ पाचनतंत्र ठीक रखने में मददगार है बल्कि लिवर और किडनी से टॉक्सिन्स को भी बाहर निकालता है।
पानी की मात्रा 2-3 लीटर रख सकते हैं।
इसके साथ में नींबू पानी और अंगूर के जूस में भी एंटीऑक्सीडेंट होते है। तो इनका सेवन करें।
लिवर क्षतिग्रस्त कम होगा
हरी सब्जियों और फलों के फायदे तो सभी जानते है। इनमे एंटीऑक्सीडेंट और फाइबर की मात्रा भरपूर होती हैं।
जो पाचन तंत्र कमजोर करने और मेटाबॉलिज्म स्लो होने पर लिवर को क्षतिग्रस्त होने से बचाते हैं।
सभी फलों में लिवर फ्रेंडली पोषक तत्व पाए जाते हैं। जामुन, अंगूर, और करौंदे खाना बहुत फायदेमंद है।
लिवर दुरूस्त रखने मददगार चीज़ें
- नींबू
- पपीता
- जैतून
- टमाटर
- आलूबुखारा
- गाजर
- चुकंदर
- पालक
- अदरक
- लहसुन
ओट्स लिवर फ्रेंडली
साबुत अनाज में पोषक तत्व जैसे हेल्दी फैट, फाइबर, एंटीऑक्सीडेंट और मिनरल पाए जाते हैं।
ओट्स, जौ में मौजूद बीटा ग्लूकन लिवर को ठीक करने में मदद करता है।
लिवर के लिए नट्स बेहतर
नट्स और दाल में विटामिन ई और फेनोलिक एसिड पाया जाता है, यह फाइबर से भरपूर हैं।
लिवर फंक्शन को बेहतर रखने में अखरोट और अन्य नट्स जैसे बादाम, काजू, किशमिश, मूंगफली आदि का सेवन करना फायदेमंद हैं।
इनसे बनाये रखें दूरी
पीलिया के बाद लिवर को ठीक होने में काफी समय लगता है।
इसलिए ऑयली, ट्रांसफैट और सैचुरेटेड फैट युक्त चीज़ों से दूरी बनाये रखें।
दही, मलाई के साथ दूध व चीज जो फैट से भरपूर है, इनसे बचना चाहिए।
सोडा, बेकरी आइटम, कार्बोनेटेड ड्रिंक, पैकेज और कैन्ड फूड से दूरी बनाकर रखना आवश्यक है।
Sunday, September 16, 2018
नींद की दवाओं के दुष्प्रभाव | Side Effects Of Sleeping Pills Hindi
Side Effects Of Sleeping Pills Hindi नींद से संबंधित समस्याओं में दिन प्रतिदिन बढ़ोतरी हो रही है जिसके समाधान के लिए लोगों को नींद की गोलियों का सेवन करना पड़ रहा हैं। इन दवाओं में ऐसे कई हानिकारक तत्व होते है जिसके कारण व्यक्ति को नींद की गोलियों पर निर्भर होना पड़ सकता हैं लोगों को ऐसा लगने लगता है कि वह उनके बिना सो नहीं सकते हैं।
नींद न आने के कुछ कारण
- समय का अभाव
- अधिक काम
- चिंता
- काम की डेड लाइन
- पुरानी बीमारियां
- ध्यान न लगना, व्याकुलता
कई सारी वजहें है जिससे नींद न आने की समस्या हो जाती है जिस कारण इन दवाओं का उपयोग किया जाता है।
ताकि सही से नींद आ सके और बार-बार उठना न पड़े।
मगर और दवाओं की तरह इन दवाओं के भी साइड इफेक्ट्स होते है।
जिसके कारण व्यक्ति इन दवाओं का आदी हो जाता है और इसका सेवन किये बिना उसे नींद नहीं आती।
नींद की दवाओं के दुष्प्रभाव
- सिर दर्द
- चक्कर आना
- मुंह सूखना
- कब्ज
- गैस
- भूख में परिवर्तन
- अनैच्छिक कम्पन्न और कमजोरी
- ध्यान और यादाश्त सम्बन्धी समस्याएं
सावधानी
- किसी भी प्रकार के नशे के साथ नींद की गोली का सेवन न करें यह बहुत ही हानिकारक हो सकता है।
- जब तक चिकित्सक की सलाह न हो दूध के साथ इसका सेवन न करें।
- चिकित्सक की सलाह के बिना अपनी इच्छा से इनकी मात्रा में वृद्धि न करें।
- कभी भी दो दवायें एक साथ न लें।
- दवा लेने का समय निश्चित हो
नियमित दुरुपयोग का परिणाम
- उनींदापन
- व्यवहार में सुस्ती
- पहनावे के प्रति लापरवाही
- अस्त-व्यस्त जीवनशैली
- दवा लेने के लिए किसी डॉक्टर की तलाश
- बेहोशी
- दिल की धड़कन कम हो जाना
अगर इन दवाओं की आदत पड़ गयी तो उस आदत को छोड़ते समय कई दिक्कतें और बहुत लम्बा समय लग सकता है।
इस आदत को छोड़ने में चिकित्सक की सलाह बहुत मददगार होती है इसलिए सलाह अवश्य लें।
जो लोग नींद की गोलियां लेना बंद करते हैं वे आम तौर पर वापसी के लक्षणों के विभिन्न स्तरों की रिपोर्ट करते हैं।
नींद की दवायें शारीरिक और मनोवैज्ञानिक निर्भरता पैदा कर सकती हैं, जिससे दूर करना मुश्किल हो जाता है।
सही उपचार योजना के साथ, सुरक्षित रूप से अपनी नींद की गोलियों को व्यवस्थित कर सकते हैं और अपने जीवन को वापस ट्रैक पर ला सकते हैं।
नींद की गोलियों छोड़ने के लक्षण खतरनाक नहीं हैं, लेकिन सावधानी नहीं हैं तो जटिलताएं हो सकती हैं।
इस दौरान, एक रोगी की अनिद्रा वापस आती है। कभी-कभी यह पहले से ज्यादा बदतर होती है।
नींद लाने के कुछ तरीके
- रात को आठ बजे तक रात का खाना खा लें ताकि मेटाबॉलिज्म नींद की प्रक्रिया में बाधक न बने
- शाम को 5 बजे के बाद चाय, कॉफी का सेवन न करें
- सोने से 2 घण्टे पहले, टीवी,लेपटॉप,मोबाइल दूर रख दें
- गुनगुने पानी से नहायें।
- मनपसंद मधुर संगीत सुने।
- आंवला या बादाम तेल से सिर पर मालिश करें।
- पैरों, पंजों की ठंडी और गर्म सेंक कर सकते है यह नींद लाने में सहायक है
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Saturday, September 8, 2018
Tips For Fat Loss In Hindi | फैट को खत्म करने के तरीकों को जाने
Tips For Fat Loss In Hindi आज के समय में, यह सवाल आमतौर पर उठाया जाता है कि पेट में जमा होने वाली किसी भी अतिरिक्त वसा को कैसे हटाया जा सकता है, क्योंकि दिन प्रतिदिन यह समस्या फैल रही है और प्रभाव जानने के बाद, हर कोई इससे बहुत डरता है। तो यदि आप भी चिंता में हैं, तो आप सही जगह पर पहुंच गए हैं, जहां आप इस समस्या से मुक्त होने के कारणों और तरीकों को जान सकते हैं।

जब आप अपने शरीर से अवांछित फैट को खत्म करने के तरीकों को जानने के लिए आगे बढ़ते हैं।
तो सबसे पहले आपको दिनभर के रूटीन और आप किस तरह का खाना लेते हैं।
आपको पहले और आपके दैनिक दिनचर्या और आदतों को देखने की जरूरत है।
ये सभी गतिविधियां वास्तव में आपके शरीर पर बहुत प्रभाव डालती हैं।
किसी भी कसरत या किसी भी आहार योजना की ओर बढ़ने से पहले, पहले उसके बारे में जानना बेहतर है।
अपनी दैनिक गतिविधियों पर ध्यान देने के बाद, अगला कदम आपको कारणों को जानने की ज़रूरत है।
वसा या विशेष रूप से पेट वसा का कारण क्या है? केवल उन्हें जानने के बाद आप अपने शरीर के लिए बुरी चीजों के बारे में जागरूक हो सकते हैं।
और जो आपके शरीर में प्रवेश करने के लिए वसा का मार्ग प्रदान करता है। ऐसे कारणों को जानना बेहतर है।
पेट में फैट बनने के कई कारण हैं, अगर हम उन सभी को गिनना शुरू करते हैं, तो इसमें काफी समय लगेगा।
लेकिन फिर भी उनमें से कुछ को देखें जो पेट के फैट के लिए वास्तव में प्रमुख कारण हैं।
Metabolism (चयापचय)

हां, मेटाबोलिज्म पेट की फैट के कारणों में से एक है। जैसा कि आपको पता होना चाहिए।
कुछ लोग बिना सोचे समझे कुछ भी खा लेते है क्यूंकि उनको अपने शरीर में फैट वसा नहीं दिखती है। यही तेज़ मेटाबोलिज्म का कारण है।
वसा की समस्या वाले लोगों के मामलों में इसके विपरीत है। उनकी मेटाबोलिज्म प्रणाली धीरे-धीरे काम करती है।
नतीजतन आपका शरीर आपके द्वारा खाए जाने वाले भोजन को पचा पाता है।
इसलिए आपको यह ध्यान रखना होगा कि आपका मेटाबोलिज्म (चयापचय) बिल्कुल ठीक नहीं है।
इसलिए आपको अपने आहार को निश्चित रूप से समायोजित करने की आवश्यकता है।
नियमित रूप से व्यायाम (Regular Workouts)

शरीर को फिट रखने के लिए व्यायाम करना बहुत जरूरी है। लेकिन पेट के फैट के मामले में और कैलोरी बर्न के लिए सही व्यायाम तेजी से परिणाम दे सकता है।
तो कुछ अभ्यास हैं जैसे कि मांसपेशियों का निर्माण करना, व्यायाम करते समय आपके शरीर की कैलोरी बर्न होती है
और यह आपके रक्त प्रवाह और मेटाबोलिज्म को भी बढ़ा देता है। तो व्यायाम अवश्य करें और एक्स्ट्रा फैट से मुक्ति पायें।
अधिक खाना (Over Eating)

मुझे नहीं लगता कि हमें इस बारे में अधिक चर्चा करने की आवश्यकता है।
क्योंकि लगभग हर कोई जानता है, जितना अधिक आप खाते हैं, उतना अधिक फैट प्राप्त करते हैं।
तो यह एक आम कारण है जो आपके पेट को समतल होने से रोकता है।
तनाव (Stress)

आम तौर पर यह देखा गया है कि जब लोग तनावग्रस्त होते हैं तो वे थोड़ा आराम पाने के लिए बार-बार भोजन करना शुरू करते हैं।
उन्हें इसका एहसास नहीं होता है। कि इस तरह, इसके परिणाम के रूप में अधिक फैट में मिलता है।
इसके अलावा, तनाव आपके शरीर की मूल फैट जलाने की प्रक्रिया को भी प्रभावित करते है।
आपके शरीर में लगातार अतिरिक्त हार्मोन उग्र हो जाते हैं और शरीर में रसायनों को छोड़ देते हैं।
गलत आहार (Wrong Kind Of Food)

विशेषज्ञों से परामर्श करने के बाद आपको बहुत ज्यादा खाना बंद करना होगा।
लेकिन यह पर्याप्त नहीं है, क्योंकि इसका मतलब यह नहीं है कि आप अपने दैनिक आहार में कैलोरी सेवन कम कर रहे हैं।
बिना कैलोरी के भोजन का उपयोग करना बेहतर है और अपने भोजन में चीनी की मात्रा कम करें। विशेषज्ञ से परामर्श करके अपने आहार चार्ट में कुछ अच्छा भोजन जोड़ें।
कारणों को जानने के बाद, आपको समाधान और ऐसे तरीकों के लिए आगे बढ़ने की आवश्यकता है।
जो आपको अपने पेट के चारों ओर अतिरिक्त फैट को कम करने में मदद कर सकता है।
तो यहां हम आपकी चिंता का समाधान करने की कोशिश कर रहे हैं।
आहार के सही विकल्प (Having A Right Food Choice)

कारणों में हमने उल्लेख किया है कि गलत भोजन या कैलोरी वाला भोजन आपको बुरी तरह नुकसान पहुंचा सकता है।
और आपके पेट के आसपास फैट पैदा कर सकता है, इसके ठीक विपरीत, सही भोजन विकल्प रखने से चमत्कारी काम हो सकता है।
इसके लिए आप कम खा सकते हैं और पेट फैट को खत्म करना शुरू कर सकते हैं।
यदि आप इसे अधिक कुशल तरीके से कम करना चाहते हैं, तो आपको खाली कैलोरी छोड़नी होगी।
आप अपने दैनिक भोजन की खपत, कुछ तरीके से कर सकते हैं।
तो यदि आपको सोडे का शौक है, तो आपको इसका उपयोग कम करना होगा।
क्योंकि इसमें बड़ी मात्रा में प्रोस्सेड चीनी होती है, और कम से कम 150 कैलोरी सोडा के एक कैन में पाई जा सकती हैं।
इस तरह आप आसानी से माप सकते हैं कि सोडा के माध्यम से आप कितनी कैलोरी लेते हैं।
सोडे के साथ, आपको फास्ट फूड खाना बंद करना पड़ेगा, काम करने वाले लोग बर्गर और फ्राइज़ सहित और कई प्रकार के फास्ट फूड का उपयोग करते हैं, इनमे जितनी कटौती हो सके करनी चाहिए।
इसके बजाय आप घर के भोजन का सेवन कर सकते है ।
कैलोरी घटाना (Burn Calories)

फैट बर्न की प्रक्रिया में, कैलोरी में कमी की अत्यधिक जरुरत होती है।
इस उद्देश्य के लिए आपको अपना खाना छोड़ने की जरूरत नहीं है, केवल थोड़ी मात्रा में खाने की आवश्यकता है।
कैलोरी आहार कम करने के दौरान आपको खुद को भूखा रखने की आवश्यकता नहीं है, आप उन्हें कम कर सकते हैं।
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Tuesday, August 14, 2018
कपालभाति प्राणायाम | KAPALBHATI PRANAYAM IN HINDI
कपालभाति प्राणायाम (Kapalbhati Pranayam in Hindi) को नियमित करने से व्यक्ति की मानसिक एवं शारीरिक परेशानियां दूर होती है। कपालभाति एक आसान योग है और कुछ दिन के लगातार अभ्यास से ये और आसान हो जाता है। इसे करने के बाद व्यक्ति को आत्मिक शांति का अहसास होता है। जो व्यक्ति इस प्राणायाम को करता है सिर्फ उसे ही इसकी अनुभूति होती है।
कपालभाति के तरीके
यह प्राणायाम करने के लिए सुबह का समय चुनें।
स्वच्छ और खुली जगह पर आलथी -पालथी की मुद्रा में बैठ जायें।
अपने दोनों हाथों को घुटनों पर रख लें कमर को बिलकुल सीधा रखें।
पेट को बिलकुल ढीला रखें।
ध्यान रहें कपालभाति में हमें सांसों (Breath) को बाहर छोड़ने पर ज्यादा ध्यान देना होता है।
नाक से साँस बाहर की ओर छोड़ें और पेट को अंदर की ओर खींचे।
इस क्रिया में साँस अंदर की ओर न खीचें जब आपका पेट बाहर की ओर आएगा साँस अपने आप खींची जाएगी।
इसी प्रक्रिया को बार-बार दोहरायें।
शुरुआत में इसे 5-10 बार करें धीरे-धीरे गिनती बढ़ाते रहे।
ज्यादा तेज गति से इस प्राणायाम को न करें। आराम से और एकाग्र होकर इस क्रिया को बार-बार करें।
बीच-बीच में थोड़ा आराम लेना चाहें तो अवश्य ले सकते है।
सावधानी
कपालभाति सुबह खाली पेट और शौच के बाद करें।
इसको करने के बाद काम से काम आधे घंटे तक कुछ भी ना खायें।
शुरू करने से पहले डॉक्टर की सलाह लें।
गर्भवती महिलायें, हाल ही में जिसका ऑप्रेशन हुआ हो और हर्निया के मरीज़ इस योग को न करें।
शुरुआती दिनों में जानकर की देखभाल में इसे कर सकते है।
इसके लाभ
कपालभाति प्राणायाम करने से वजन कम (Weight Loss) किया जा सकता है।
इसे करने से निर्जीव से दिखने वाले चेहरे पर चमक आ जाती है।
प्राणायाम दिमागी तौर पर व्यक्ति को शांत रखता है, तनाव और मानसिक परेशानियां भी दूर हो जाती है।
आँखों के नीचे कालापन (How to Dark Circle in Hindi) और झुर्रियां दूर करने में मदद करता है।
एसिडिटी (Acidity) और गैस जैसी समस्या भी कम होती है।
यह प्राणायाम रोजाना करने से रक्त प्रभाव (Blood circulation) भी सही तरह से होता है।
स्मरण शक्ति (memory power) बढ़ाता है।
अगर व्यक्ति चिंता एवं मानसिक तनाव से मुक्त रहता है तो प्रसन्न रहने से साथ व्यक्ति आत्मविश्वास भी लौटता है।
कपालभाति शब्द दो अलग-अलग शब्दों से बना है कपाल और भाति। कपाल शब्द का मतलब है माथा (forehead) और भाति शब्द का मतलब चमक (lighting) होता है। कपालभाति करने से शरीर की मांसपेशियां सक्रिय हो जाती है। इसके अलावा यह योग साँस लेने वाले अंगो को भी सही तरीके से काम करने में मदद करता है।
Sunday, August 5, 2018
नींबू के फायदे | Health Benefits of Lemon in Hindi
Health Benefits of Lemon in Hindi नींबू का इस्तेमाल सिर्फ खाने का स्वाद बढ़ाने के लिए ही नहीं बल्कि कई और वजहों से भी किया जाता है। हमारे स्वास्थ्य के लिए नींबू का सेवन बहुत ही फायदेमंद है। ऐसी बहुत सी बीमारियां है जो इसके नियमित रूप से इस्तेमाल करने से दूर हो जाती है। आइए जानते है इसके लाभ।
एंटीऑक्सीडेंट्स
नींबू में एंटीऑक्सीडेंट्स तत्व काफी मात्रा में होते है ये हमारे शरीर को रोग प्रतिरोधक बनाने में मदद करते है।
वायरस और बैक्टीरिया से होने वाली बीमारियों से बचाव के लिए नींबू के रस का सेवन करना चाहिए।
आयरन का स्रोत
नींबू में आयरन का अच्छा स्रोत होता है इसलिए या हमारे रक्त में हीमोग्लोबिन को बढ़ाने में मददगार साबित होता है
मजबूत नर्वस सिस्टम
नींबू में फॉस्फोरस और पौटेशियम जैसे तत्व पाए जाते है जो हमारे ब्रेन सेल्स और नर्वस सिस्टम को मजबूत बनाये रखते है।
कैंसर से बचाव
इसमें मौजूद विटामिन सी एंटीऑक्सीडेंट्स तत्वों के साथ मिलकर कैंसर जैसी खतरनाक बीमारी से लड़ने में मदद करता है।
पाचन क्रिया दुरुस्त
एक गिलास गरम पानी में थोड़ा सा नींबू का रस डालकर पीने से पाचन क्रिया ठीक रहती है।
स्वस्थ मसूड़े
मसूढ़ों से खून आता हो तो जिस जगह से खून आता है वहां पर नींबू का रस लगाने से खून आना बंद हो जाता है और मसूढे स्वस्थ हो जाते है।
गले के लिए फायदेमंद
नींबू का रस पानी में मिलाकर गरारा करने से गला खुल जाता है।
साथ ही खांसी-जुकाम जैसी संक्रामक बीमारियों से बचाव के लिए नींबू का सेवन करना चाहिए।
हाई ब्लड प्रेशर
नींबू का रस हाई ब्लड प्रेशर को संतुलित रखता है।
पेट के लिए लाभदायक
ख़राब पेट जैसे कब्ज, दस्त होने पर नींबू का रस पीने से राहत मिलती।
थकान दूर करें
अत्यधिक थकान महसूस होने पर एक गिलास पानी में नींबू निचोड़कर पियें।
इससे एनर्जी मिलती है और बॉडी फिटनेस भी बनी रहती है।
इम्यूनिटी बढ़ाए
नींबू पानी पीने से इम्यूनिटी बढ़ती है। इससे घाव जल्दी ठीक होते हैं।
खूबसूरती बढ़ाए
नींबू को अपनी डाइट में शामिल करने से त्वचा की रंगत में निखार आता है।
नींबू का छिलका कोहनी पर रगड़ने से कालापन दूर हो जाता है।
आँखों के लिए फायदेमंद
नींबू का सेवन करने से आंखें स्वस्थ रहती है। आँखों की रोशनी के लिए नींबू के रस का रोजाना सेवन करना चाहिए।
गले में इन्फेक्शन, कब्ज की शिकायत, दातों से जुडी समस्याएं, बुखार, हाई ब्लड प्रेशर आदि से अक्सर परेशान रहते है। नींबू में ऐसे गुण है, जो आपको ताजगी के अहसास के साथ ही तमाम परेशानियों से जूझने की ताकत देते है। नींबू का रास विटामिन सी व बी, कैल्शियम, फॉस्फोरस, मैग्नीशियम, प्रोटीन और कार्बोहाइड्रेट से समृद्ध होता है।
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Tuesday, May 1, 2018
सन बर्न, से होने वाली खुजली दूर करने के तरीके
How to Stop Itching Sunburned Skin तेज धूप के कारण त्वचा में खुजली की समस्या होने लगती है। खुजली जैसी समस्याओं को दूर करने के लिए यह प्राकृतिक उपचार अपनाए जा सकते हैं.
अल्ट्रावायलेट किरणों के कारण सन बर्न हो जाता है. इसके कारण त्वचा लाल हो जाती है।उस पर खुजली होने लगती है और वो क्षतिग्रस्त भी हो सकती है।
अगर कोई आउटडोर काम करना चाहते हैं तो कोशिश करना चाहिए कि उन्हें सुबह या शाम को करें।
अगर सनबर्न से बचना चाहते हैं तो, सुबह 10 बजे से दोपहर 4 बजे तक बाहर न निकलें।
सनबर्न के कारण त्वचा में तेज दर्द या सनस्क्रीन लोशन से संवेदनशील हो जाए।
तो पूरी अस्तीन के कपड़े पहनने चाहिए। कुछ उपाय करने से इस स्थिति को रोकने में सहायता मिल सकती है।
धूप में 1 घंटे में तीन गिलास पानी
हाइड्रेटेड रहने के लिए अधिक मात्रा में तरल पदार्थों का सेवन करना चाहिए।
जब धूप में रहें, तो हर घंटे में 3 गिलास पानी का सेवन करना चाहिए।
कभी-कभी स्पोर्ट्स ड्रिंक्स भी इलेक्ट्रोलाइट्स के साथ लें।
इससे शरीर में नमक की जो कमी हुई है उसकी पूर्ति हो जाती है और यह शरीर में फ्ल्यूड को रोककर रखता है।
नमक का सेवन कम करना चाहिए।
बारबेक्यू फूड्स लेने से बचिए
मौसमी फल और दही का सेवन करना चाहिए, ये एक अच्छा विकल्प है।
बारबेक्यु फूड्स के सेवन से बचना चाहिए।
पोटेटो सलाद और कोलेस्ला जो खट्टा हो सकता है और पेट खराब कर सकता है।
जी मचलाना, चक्कर आना थकान जैसी समस्या हो तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।
ठंडक के लिए दो बार शावर लें
शरीर को ठंडा रखने के गर्मियों में कम से कम दिन में दो बार नहाना चाहिए।
पीने के लिए अपने साथ हमेशा पानी की बोतल रखनी चाहिए।
सनस्क्रीन और कूल कम्प्रेस
धूप में निकलने से बीस मिनिट पहले, 30 एसपीएफ या उससे अधिक वाला सनस्क्रीन लगाएं।
एक ठंडा गीला टॉवेल सनबर्न से आराम दे सकता है और खुजली को कम कर सकता है।
मॉइस्चराइजर का प्रयोग
सनबर्न से त्वचा में खिंचाव आ जाता है, वो सूखी और खुजली वाली हो जाती है।
त्वचा को हाइड्रेटेड करने के लिए विटामिन सी और ई युक्त मॉइस्चराइजर का उपयोग करना चाहिए।
करें एलोवेरा का इस्तेमाल
एलोवेरा, सनबर्न का पारंपरिक उपचार है। इसमें घावों को भरने का प्रभाव भी होता है।
एलोवेरा के रस या जेल का इस्तेमाल करें
करें डॉक्टर से तुरंत संपर्क
सनबर्न के कारण अगर बुखार आ गया हो, या शरीर की 20 प्रतिशत त्वचा पर फफोले हो गए हों या अगर चक्कर आ रहे हों तो इसके कारण डिहाइड्रेशन हो सकता है, ऐसी स्थिति में तुरंत डॉक्टर को दिखाना चाहिए।
दूध में भिगोकर रूई के फाहे रखिए
त्वचा पर जहां-जहां सनबर्न हुआ हो, वहां ठंडे दूध में भिगोकर रूई के फाहे रखें।
ध्यान रहे दूध अधिक ठंडा नहीं होना चाहिए।
प्रभावित त्वचा पर परफ्यूम और साबुन लगाने से बचिए।
नहाने के पानी में खाने का सोडा
नहाने के पानी में एक कप एप्पल सिडर विनेगर मिला लें, ताकि त्वचा का पीएच संतुलन बनाने में सहायता मिल सके, और त्वचा हील हो सके।
हल्दी पुदीने या खीरे का पेस्ट
खीरे में एंटी ऑक्सीडेंट्स होते हैं और इसमें दर्द निवारक गुण होते हैं, इस वजह से यह सनबर्न में बहुत आराम पहुंचाता है।
ठंडे खीरे को मैश करें और पेस्ट को प्रभावित क्षेत्र पर लगाएं।
सनबर्न से प्रभावित क्षेत्र पर हल्दी, पुदीने और दही का मिश्रण लगाने से भी त्वचा को आराम मिलता है।
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Thursday, March 29, 2018
क्या आप सही कैलोरी पहचानते हैं ?
फिटनेस की बात आते ही कैलोरी का ज़िक्र होना लाज़मी है। लेकिन कई लोगों के मन में कैलोरी को लेकर अक्सर भ्रम रहता है। भोजन में कितनी कैलोरी है, हमें उसकी कितनी ज़रूरत है, सिर्फ़ कैलोरी से शरीर की सारी जरूरतें पूरी होती हैं आदि इस तरह की कई जिज्ञासाएं मन में रहती हैं। यह जानना भी रुचिपूर्ण होगा कि कैसी कैलोरी काम की है।
कैलोरी क्या है?:- मानव शरीर के लिए आवश्यक ऊर्जा को कैलोरी की इकाई में मापा जाता है। इसे हम अपने भोजन से मेटाबॉलिक प्रक्रिया से प्राप्त करते हैं और दैनिक गतिविधियों या शारीरिक कार्य करने पर इस ऊर्जा का इस्तेमाल करते हैं। अलग-अलग खाद्य पदार्थ या उनसे बने व्यंजनों में कैलोरी की मात्रा अलग-अलग होती है।
कैलोरी और खाली कैलोरी में अंतर:- ऐसे खाद्य पदार्थ जिनमें कैलोरी के अलावा और कोई भी पोषक तत्व नहीं है, उनसे प्राप्त ऊर्जा को खाली कैलोरी कहते हैं। ऐसे खाद्यों में प्रोटीन, खनिज, विटामिन, कार्बोहाइड्रेट या रेशों की मात्रा नगण्य होती है। खाली कैलोरी अधिक मात्रा में लेना मोटापे का बड़ा कारण हो सकता है। इसका मुख्य उदाहरण शक्कर है, जिसमें कैलोरी के अलावा कोई भी पौष्टिक तत्व नहीं होता है।
रोटी में है पूर्ण आहार:- अलग-अलग तरह के खाद्य पदार्थों से हमें कुछ कुछ कैलोरी प्राप्त होती है जिसमें मौजूद अन्य पोषक तत्व उस खाद्य पदार्थ को पौष्टिक बनाते है। आटे से बनी रोटी में रेशों और कार्बोहाइड्रेट की मात्रा अधिक है, जो आवश्यक पोषक तत्व हैं। जबकि ब्रेड में ख़मीर और अन्य रासायनिक पदार्थ मिले हुए होते हैं जिस कारण उसमें पोषक तत्वों की मात्रा कम हो जाती है या कह सकते हैं नगण्य रहती है।
Health tips in hindi
फास्ट फूड में अधिक कैलोरी की मात्रा:- घरके खाने की बजाए हम बाहर का खाना अधिक पसंद करते हैं। ख़ासतौर पर फ़ास्टफूड बच्चों को अधिक पसंद होते हैं। इनमें घर के खाने की अपेक्षा अधिक मात्रा में कैलोरी होती है जिस वजह से शरीर में वसा की मात्रा बढ़ती है और शरीर को मोटापा घेर लेता है। उदाहरण के लिए एकरोटी में 0.56 ग्राम वसा की मात्रा होती है जबकि पिज़्ज़ा के एक टुकड़े में 10 ग्राम वसा की मात्रा होती है। पिज़्ज़ामें अधिक मात्रा में कोलेस्ट्रॉल रहता है वहीं रोटी में इसकी मात्रा शून्य होती है।
भ्रम में आकर भोजन न छोड़ें:- कई बार त्योहार के समय ज़्यादा मात्रा में रसगुल्ले या गरिष्ठ भोजन करने पर लोगों को लगता है कि ज़्यादा कैलोरी वाला भोजन हो गया इस कारण वे एक समय का खाना छोड़ देते हैं। हमारे मेटाबॉलिज़्म पर भी इसका नकारात्मक प्रभाव पड़ता है। कोशिश करें कि आप जो भी खा रहे हैं वो सही मात्रा में हो। अगर आप गरिष्ठ भोजन की वजह से खाना छोड़ रहे हैं तो ये ज़रूरी नहीं कि बाद में आप सही अनुपात में ही भोजन करेंगे, हो सकता है कि अधिक भूख लगने की वजह से आप ज़्यादा मात्रा में भोजन लें। कई बार लंबे समय तक डाइटिंग करने के कारण शरीर में विटामिन खनिज की कमी होने की संभावना बढ़ जाती है।
ऐसे बढ़ती है कैलोरी:- यदि आप तला भोजन करते हैं तो उसमें कैलोरी की मात्रा बढ़ जाती है। जैसे सादा रोटी में अगर घी लगा लेंगे तो उसमें कैलोरी की मात्रा बढ़ जाएगी, या रोटी की अपेक्षा पूड़ियां खाते हैं तो इसमें कैलोरी अधिक मात्रा में होगी। इसलिए अधिक तला भोजन करने से बचने की कोशिश करें।
















